Saturday, 2 October, 2010

हम बच्चों के प्यारे बापू - कृष्ण कुमार यादव


देश के प्यारे गाँधी बाबा
बच्चों के बापू कहलाए
सत्य-अहिंसा की नीति से
देश को आजादी दिलवाए .

सूरज से चमके बापू जी
कभी न हिम्मत हारे थे
अंगरेजों को मार भगाया
पीछे-पीछे सारे थे .

हम बच्चों के प्यारे बापू
सपनों में जब आते हैं
सत्य, अहिंसा, दया, धर्म
देश प्रेम का पाठ पढ़ाते हैं।

-कृष्ण कुमार यादव-

16 comments:

Dr. Brajesh Swaroop said...

हम बच्चों के प्यारे बापू
सपनों में जब आते हैं
सत्य, अहिंसा, दया, धर्म
देश प्रेम का पाठ पढ़ाते हैं।

...बहुत सुन्दर भाव...के.के. यादव और आकांक्षा जी को बधाई.

Dr. Brajesh Swaroop said...

हम बच्चों के प्यारे बापू
सपनों में जब आते हैं
सत्य, अहिंसा, दया, धर्म
देश प्रेम का पाठ पढ़ाते हैं।

...बहुत सुन्दर भाव...के.के. यादव और आकांक्षा जी को बधाई.

Dr. Brajesh Swaroop said...

गाँधी-जयंती पर सुन्दर प्रस्तुति....गाँधी बाबा की जय हो.

प्रवीण पाण्डेय said...

राष्ट्रपिता को प्रणाम

रावेंद्रकुमार रवि said...

----------------------------------------
बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
----------------------------------------

डा0 हेमंत कुमार ♠ Dr Hemant Kumar said...

आकांक्षा जी,कृष्ण कुमार यादव जी का इतना प्यारा गीत पढ़वाने के लिये आभार स्वीकार करें।

Shyama said...

देश के प्यारे गाँधी बाबा
बच्चों के बापू कहलाए
सत्य-अहिंसा की नीति से
देश को आजादी दिलवाए .

......कविता बेजोड़ है..बधाई.

Shyama said...

महात्मा गाँधी और लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर शत-शत नमन ।

Akanksha Yadav said...

सत्य, अहिंसा, दया, धर्म
देश प्रेम का पाठ पढ़ाते हैं।

..गांधी जयंती पर सुन्दर बाल-गीत.हार्दिक शुभकामनाएं.

Akanksha Yadav said...

@ Dr. Brajesh,
@ Hemant Kumar,

आपकी शुभकामनाओं के लिए आभार. अपना स्नेह यूँ ही बनाये रहें.

रानीविशाल said...

बहुत सुन्दर बाल गीत ....आभार
नन्ही ब्लॉगर
अनुष्का

Akshitaa (Pakhi) said...

बापू जी तो हम बच्चों को खूब प्यार करते थे...प्यारी लगी यह कविता.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बापू जी को नमन!
--
आपकी इस पोस्ट की चर्चा
बाल चर्चा मंच पर भी की गई है!
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/10/21.html

Akanksha Yadav said...

@ Mayank ji,

चर्चा के लिए आभार.

raghav said...

भावनाओं को अच्छे शब्द दिए हैं ...

editor : guftgu said...

आज के दौर में काफी प्रासंगिक है यह भाव...बधाई.