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Wednesday, 2 November 2011

जय हो वीर जवानों की- डॉ० राष्ट्रबंधु

वीर जवानों की जय हो
भारतमाता की जय हो

जो कि सत्य के लिए अड़े
जो कि न्याय के लिए लड़े
भारत माँ की रक्षा में
प्राणदान के लिए बढ़े।
सत्कर्मों का संचय हो
भारतमाता की जय हो।

सर्दी में जो पड़े रहे
मोर्चे पर जो अड़े रहे
नेफा में कश्मीर में
ले बन्दूकें खड़े रहे
पराधीनता का क्षय हो
भारतमाता की जय हो।

उनसे सबकी आजादी
उनसे सबकी खुशहाली
राणा शिवा सुभाष वे
युग उनसे गौरवशाली
परंपरा यह अक्षय हो
भारतमाता की जय हो।


-डॉ० राष्ट्रबंधु
संपादक-बाल साहित्य समीक्षा
रामकृष्ण नगर, कानपुर (यू. पी.)

Friday, 24 June 2011

धरती को प्रणाम मेरा : डॉ० राष्ट्रबंधु


कण कण को प्रणाम मेरा
क्षण क्षण को प्रणाम मेरा
प्रतिभा को प्रणाम मेरा
धरती को प्रणाम मेरा।

चित्रकूट, वृन्दावन, केरल
सोमनाथ उज्जयिनी धाम
रोमेश्वर, नवद्वीप, अमृतसर
कपिवस्तु साँची अभिराम।
श्रमण बेल गोला, अजमेरी
आस्था को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

जहाँ गुफाएँ और सुरंगें
कहती हैं श्रम की महिमा
खजुराहो, कोणार्क, अजंता
जड़ को देते हैं गरिमा।
चेतन शिल्पकार अनजाने
प्रतिभा को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

मिट्टी के नीचे चट्टानें
जहाँ संगमरमर शैशव
बंजर धरती में भी धन है,
सतत् साधना से वैभव
प्रासादों में पाषाणों की
शोभा को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

वर्षा सब ऋतुओं में रहती
गढ़ती है मनचाहा रूप
हरियाली का फल फसलें हैं
जिनका रूपक भव्य अनूप।
सृजन प्ररूप पानी पर निर्भर
कृषकों को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

छोटे पर्वत बड़े हो गए
बूढ़े कमर झुकाए हैं
उनके ऊपर पशु चलते हैं
पक्षी पर फैलाए हैं
विंध्याचल सहयाद्रि हिमालय
श्रमिकों को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

नैमिष, उत्पल, दण्डक, सुन्दर
वन अंचल केवल हैं शेष
आग और पानी रखते हैं
खनिज खनन देते अवशेष।
बैलाडीला, झारखण्ड के
श्रमिकों को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

कुरुक्षेत्र, हल्दीघाटी के,
कण कण में इतिहास सना
मैदानी भागों में जन जन
के कारण विस्तार बना।
कच्छ, पोखरन हरिकोटा
वैज्ञानिक को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

-डॉ० राष्ट्रबंधु-

Monday, 6 June 2011

तालमेल : डॉ० राष्ट्रबंधु


एक फूल पाँखुरी
फूल छोड़कर बढ़ी
वायु के बहाव में
पंक में गिरी झड़ी
हो गई विवश विलाप कर रही
रूप रंग गंध लिए मर रही।

एक बूँद नीर की
साथ छोड़कर बढ़ी
ताप में जली भुनी
भाप की बढ़ी चढ़ी
सूखने लगी अलग थलग हुई
बन गई प्रवाह में छुई मुई।

एकता के योग से
एक तारिका गिरी
अपशकुन हुआ कहीं
व्योम में लगी झिरी
तालमेल टूटना प्रलाप है
तालमेल बैठना प्रताप है।

-डॉ० राष्ट्रबंधु-

Wednesday, 12 January 2011

हम बच्चे प्यारे हैं - डा0 राष्ट्रबंधु

आकाश हमारा है, हमसे उजियारे हैं
तारों जैसे चमचम, आँखों के तारे हैं
हम बच्चे प्यारे हैं।

सौतेले रिस्तों को ध्रुव ने जितना जाना
प्रहलाद पिता पीड़ित ने भोगा जुरमाना
हम वंचित सारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

लवकुश सीता माँ के, गायक बंजारे हैं
तुलसी के चौरे के, हम दीपक न्यारे हैं
हम भाग्य तुम्हारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

दुनिया छोटी लगती, दुनियादारी ठगती
एकलव्य हमारा है, संतोष सहारा है
कर्तव्य हमारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

अधिकार तुम्हारे हैं, तानों के मारे हैं
बरगद की छाया में, अपनों से हारे हैं
हम स्वयं सहारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

हम अपना श्रम देकर, सभ्यता सँवारे हैं

सबकी नजरों से हम गए उतारे हैं
मुस्कान सँवारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

हम वोट नहीं देते, हम नोट नहीं लेते
बटते कब पक्षों में, यक्षों या कक्षा में
आवरण उघारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

बनकर जुलूस लम्बा, छोटापन धारे हैं
जो जीत चुनाव गए, हम उनके मारे हैं
कब लगे किनारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

-डा० राष्ट्रबंधु

Sunday, 12 December 2010

प्यारा प्यारा भारत देश - डॉ० राष्ट्रबंधु


फूलों और फलों का देश
मीठा स्वाद सलोना वेश
प्यारा प्यारा भारत देश।

पर्वत रखते हैं ऊँचाई
रत्नाकर रखते गहराई
नदियों में बहता है अमृत
निर्झर ने ताकत दिखलाई
मेघ माँगते हैं आदेश
हरा भरा करते परिवेश
प्यारा प्यारा भारत देश।

काली पीली कुछ सिन्दूरी
कहीं भुरभुरी गोरी भूरी
मिट्टी कोहनूर रखती है
फसलों ने की आशा पूरी
अन्नपूर्णा माँ का वेश
दानशीलता का संदेश
प्यारा प्यारा भारत देश।

यहाँ शारदा गीत सुनाती
माँ रणचण्डी हमें जगाती
कृतियों ने इतिहास रचाया
हम गाते हैं गीत प्रभाती
गंध भरे इसके अवशेष
नित्य नया न्यारा उन्मेष
प्यारा प्यारा भारत देश।

-डॉ० राष्ट्रबंधु

Tuesday, 20 July 2010

बच्चे हिन्दुस्तान के : डा0 राष्ट्रबंधु


बच्चे हिन्दुस्तान के
चलते सीना तान के
तानसेन की तरह गा रहे
नया तराना शान से।

हम किरणों जैसा चमकाते
कण कण के इतिहास को
हम विलास को छोड़ मोड़ते
वैभवपूर्ण विलास को।
हमने अपने रथ के घोड़े
रक्खे हरदम तान के
भाग्य बनाते अपने सबके
बंजर रेगिस्तान के।
बच्चे हिन्दुस्तान के...।।

शीत चाँदनी जैसे हम हैं
पूरनमासी लक्ष है
नहीं अमावस्या में अटके
मंजिल दूर समक्ष है।
गीता गायन करते रहते
कर्म प्रमुखता मान के।
बच्चे हिन्दुस्तान के ..।।

-डा० राष्ट्रबंधु