Wednesday, 16 February, 2011

झूठी हुई कहावत : घमंडी लाल अग्रवाल


यदि तुम खेलोगे-कूदोगे
तो ख़राब बन जाओगे,
झूठी हुई कहावत यह तो,
सबको ही बतलाओगे।

पढ़ने-लिखने वाले ही क्या
बस नवाब बन पाते हैं?
खेलकूद में रहते अव्वल
वे भी नाम कमाते हैं,
नई धरा है, नया गगन है
नये लक्ष्य तुम पाओगे।

देखो चाहे तेंदुलकर को
या सुनील गावस्कर को,
अथवा पी. टी. ऊषा हो फिर
खेल प्रिय नारी-नर को,
खेलों से ही नाम कमाया,
कैसे उन्हें भुलाओगे?

कितने पुरस्कार खेलों में,
देतीं अपनी सरकारें,
नौकरियों में मिले वरीयता
खुशियाँ हैं झाला मारें,
बढ़ें अगर खेलों में आगे
जीत वलर्ड कप लाओगे।

स्वास्थ्य बने खेलों से उत्तम,
मान और सम्मान मिले,
खेल बढ़ाते भाईचारा,
पंथ बहुत आसान मिले,
खेलो, सुस्ती दूर धकेलो
पूरे जग में छाओगे।

घमंडी लाल अग्रवाल, 785/8 अशोक विहार, गुडगाँव-122001

11 comments:

Unknown said...

बहुत अच्छा लिखा है आपने मजा आ गया

रावेंद्रकुमार रवि said...

बहुत बढ़िया उपदेशात्मक!

Sunil Kumar said...

ab yah khavat galat ho gayi hai kheloge kudoge banoge nabab.....

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर जी, कल से गिल्ली डंडा फ़िर से चालू

Mukesh said...

घमंडी ला अग्रवाल जी की रचनायें पहले भी पढ़ी थी........................बहुत प्रेरणास्पद।

प्रस्तुति के लिये धन्यवाद

प्रवीण पाण्डेय said...

घर में पढ़ लो, खेलो कूदो,
व्यर्थ समय न हो, यह देखो।

डॉ. नागेश पांडेय संजय said...

शिक्षाप्रद

Akshitaa (Pakhi) said...

पढाई और खेल दोनों जरुरी है..सुन्दर कविता..बधाई !!

Unknown said...

सच्ची बात कही जी...सुन्दर कविता.

Amit Kumar Yadav said...

..बहुत बढ़िया सीख देती रचना ....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

वाह!
बहुत सुन्दर रचना!
आपकी पोस्ट की चर्चा तो बाल चर्चा मंच पर भी है!
http://mayankkhatima.blogspot.com/2011/02/34.html