Friday, 20 August, 2010

बन्दर आया : संजय भास्कर


बन्दर आया बन्दर आया
मेरे घर एक बन्दर आया
मैं डर कर भागा अन्दर
मेरे पीछे पड़ गया बन्दर
मैंने तब उसे केला दिखलाया
सोचा, मुश्किल से पीछा छुडाया
बन्दर निकला बड़ा चालाक
करता रहा भागम-भाग
बन्दर ने मुझसे केला छीना
मुझको आया जोर का पसीना
बन्दर आया बन्दर आया
मेरे घर एक बन्दर आया.

संजय भास्कर

7 comments:

Ashish (Ashu) said...

bander aaya....bander aaya.....achi suruvaat hai...bachpan me mai bhi bander se bahut derta tha.....aapke is blog ko meri subhkamnaye....

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत मज़ा आया।

मुकेश कुमार सिन्हा said...

bandar wale sanjay bhaiya.........:)
badi pyari rachna........

संजय भास्‍कर said...

बहुत बहुत शुक्रिया
आकांक्षा जी

.........मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार !

संजय भास्कर
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Akanksha Yadav said...

सुन्दर और मनभावन बाल-गीत...बधाई संजय भास्कर जी को.

Bhanwar Singh said...

बन्दर ने मुझसे केला छीना
मुझको आया जोर का पसीना
बन्दर आया बन्दर आया

...Ha..ha..ha..majedar bal-geet...badhai.

रावेंद्रकुमार रवि said...

मनभावन होने के कारण
"सरस पायस" पर हुई "सरस चर्चा" में
प्यारी-प्यारी इस चर्चा में प्यार बहुत है
!

शीर्षक के अंतर्गत
इस पोस्ट की चर्चा की गई है!