Friday 30 December 2011

नव वर्ष की शुभकामनाएं


..!!नव-वर्ष 2012 की आप सभी को अग्रिम शुभकामनाएं..!!

Sunday 25 December 2011

क्रिसमस की कहानी...

क्रिसमस त्यौहार बड़ा अलबेला है. पूरी दुनिया में धूमधाम से मनाया जाने वाला क्रिसमस प्रभु ईसा मसीह या यीशु के जन्म की खुशी में हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला पर्व है।यह ईसाइयों के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है। इस दिन को बड़ा दिन भी कहते हैं. दुनिया भर के अधिकतर देशों में यह 25 दिसम्बर को मनाया जाता है, पर नव वर्ष के आगमन तक क्रिसमस उत्सव का माहौल कायम रखता है. उत्सवी परंपरा के अनुसार क्रिसमस से 12 दिन के उत्सव क्रिसमसटाइड की भी शुरुआत होती है। एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म, 7 से 2 ई.पू. के बीच हुआ था। विभिन्न देश इसे अपनी परम्परानुसार मानते हैं. जर्मनी तथा कुछ अन्य देशों में क्रिसमस की पूर्व संध्या यानि 24 दिसंबर को ही इससे जुड़े समारोह शुरु हो जाते हैं जबकि ब्रिटेन और अन्य राष्ट्रमंडल देशों में क्रिसमस से अगला दिन यानि 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप में मनाया जाता है। कुछ कैथोलिक देशों में इसे सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहते हैं। आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च 6 जनवरी को क्रिसमस मनाता है, वहीँ पूर्वी परंपरागत गिरिजा जो जुलियन कैलेंडर को मानता है वो जुलियन वेर्सिओं के अनुसार 25 दिसम्बर को क्रिसमस मनाता है, जो ज्यादा काम में आने वाले ग्रेगोरियन कैलेंडर में 7 जनवरी का दिन होता है क्योंकि इन दोनों कैलेंडरों में 13 दिनों का अन्तर होता है।

क्रिसमस शब्द का जन्म क्राईस्टेस माइसे अथवा ‘क्राइस्टस् मास’ शब्द से हुआ है। ऐसी मान्यता है कि पहला क्रिसमस रोम में 336 ई. में मनाया गया था। क्राइस्ट के जन्म के संबंध में नए टेस्टामेंट के अनुसार व्यापक रूप से स्वीकार्य ईसाई पौराणिक कथा है। इस कथा के अनुसार प्रभु ने मैरी नामक एक कुंवारी लड़की के पास गैब्रियल नामक देवदूत भेजा। गैब्रियल ने मैरी को बताया कि वह प्रभु के पुत्र को जन्म देगी तथा बच्चे का नाम जीसस रखा जाएगा। वह बड़ा होकर राजा बनेगा, तथा उसके राज्य की कोई सीमाएं नहीं होंगी। देवदूत गैब्रियल, जोसफ के पास भी गया और उसे बताया कि मैरी एक बच्चे को जन्म देगी, और उसे सलाह दी कि वह मैरी की देखभाल करे व उसका परित्याग न करे। जिस रात को जीसस का जन्म हुआ, उस समय लागू नियमों के अनुसार अपने नाम पंजीकृत कराने के लिए मैरी और जोसफ बेथलेहेम जाने के लिए रास्ते में थे। उन्होंने एक अस्तबल में शरण ली, जहां मैरी ने आधी रात को जीसस को जन्म दिया तथा उसे एक नांद में लिटा दिया। इस प्रकार प्रभु के पुत्र जीसस का जन्म हुआ।

आजकल क्रिसमस पर्व धर्म की बंदिशों से परे पूरी दुनिया में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है. क्रिसमस के दौरान एक दूसरे को आत्मीयता के साथ उपहार देना, चर्च में समारोह, और विभिन्न सजावट करना शामिल है। सजावट के दौरान क्रिसमस ट्री, रंग बिरंगी रोशनियाँ, बंडा, जन्म के झाँकी और हॉली आदि शामिल हैं। क्रिसमस ट्री तो अपने वैभव के लिए पूरे विश्व में लोकप्रिय है। लोग अपने घरों को पेड़ों से सजाते हैं तथा हर कोने में मिसलटों को टांगते हैं। चर्च मास के बाद, लोग मित्रवत् रूप से एक दूसरे के घर जाते हैं तथा दावत करते हैं और एक दूसरे को शुभकामनाएं व उपहार देते हैं। वे शांति व भाईचारे का संदेश फैलाते हैं।

सेंट बेनेडिक्ट उर्फ सान्ता क्लाज़, क्रिसमस से जुड़ी एक लोकप्रिय पौराणिक परंतु कल्पित शख्सियत है, जिसे अक्सर क्रिसमस पर बच्चों के लिए तोहफे लाने के साथ जोड़ा जाता है. मूलत: यह लाल व सफेद ड्रेस पहने हुए, एक वृद्ध मोटा पौराणिक चरित्र है, जो रेन्डियर पर सवार होता है, तथा समारोहों में, विशेष कर बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वह बच्चों को प्यार करता है तथा उनके लिए चाकलेट, उपहार व अन्य वांछित वस्तुएं लाता है, जिन्हें वह संभवत: रात के समय उनके जुराबों में रख देता है।

क्रिसमस पर्व पर आप सभी को बधाई और शुभकामनाएं !!

आकांक्षा यादव

Sunday 18 December 2011

विश्व की सबसे छोटे कद की महिला : ज्योति

इनसे मिलिए..ये हैं ज्योति. यह भारतीय किशोरी अब विश्व की सबसे छोटे कद की महिला बन गई है। हिवरी नगर निवासी ज्योति ने विश्व की सबसे सबसे छोटे कद की महिला होने का खिताब हासिल किया है। ज्योति की लंबाई केवल 62 . 8 सेंटीमीटर या तकरीबन दो फुट एक इंच लंबी है। ज्योति की उम्र 18 साल हो गई है।


ज्योति ने अमेरिका की ब्रिजेट जार्डन का इस साल की शुरूआत में बना रिकार्ड तोडा। दो साल पहले भी ज्योति ने इस खिताब के लिए दावा किया था लेकिन उस समय वह 16 वर्ष की थी इसलिए उसे यह खिताब नहीं दिया गया। अब 18 साल की होने पर ज्योति को इस खिताब से नवाजा गया है।

Wednesday 16 November 2011

सबसे कम उम्र में 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' का कीर्तिमान अक्षिता (पाखी) के नाम

(बाल दिवस, 14 नवम्बर पर विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में महिला और बाल विकास मंत्री माननीया कृष्णा तीरथ जी ने हमारी बिटिया अक्षिता (पाखी) को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2011 से पुरस्कृत किया. अक्षिता इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाली सबसे कम उम्र की प्रतिभा है.यही नहीं यह प्रथम अवसर था, जब किसी प्रतिभा को सरकारी स्तर पर हिंदी ब्लागिंग के लिए पुरस्कृत-सम्मानित किया गया.प्रस्तुत है इस पर एक रिपोर्ट-





आज के आधुनिक दौर में बच्चों का सृजनात्मक दायरा बढ़ रहा है. वे न सिर्फ देश के भविष्य हैं, बल्कि हमारे देश के विकास और समृद्धि के संवाहक भी. जीवन के हर क्षेत्र में वे अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहे हैं. बेटों के साथ-साथ बेटियाँ भी जीवन की हर ऊँचाइयों को छू रही हैं. ऐसे में वर्ष 1996 से हर वर्ष शिक्षा, संस्कृति, कला, खेल-कूद तथा संगीत आदि के क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चों हेतु हेतु महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' आरम्भ किये गए हैं। चार वर्ष से पन्द्रह वर्ष की आयु-वर्ग के बच्चे इस पुरस्कार को प्राप्त करने के पात्र हैं.

वर्ष 2011 के लिए 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' 14 नवम्बर 2011 को विज्ञानं भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ द्वारा प्रदान किये गए. विभिन्न राज्यों से चयनित कुल 27 बच्चों को ये पुरस्कार दिए गए, जिनमें मात्र 4 साल 8 माह की आयु में सबसे कम उम्र में पुरस्कार प्राप्त कर अक्षिता (पाखी) ने एक कीर्तिमान स्थापित किया. गौरतलब है कि इन 27 प्रतिभाओं में से 13 लडकियाँ चुनी गई हैं. सम्प्रति अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भारतीय डाक सेवा के निदेशक और चर्चित लेखक, साहित्यकार, व ब्लागर कृष्ण कुमार यादव एवं लेखिका व ब्लागर आकांक्षा यादव की सुपुत्री और पोर्टब्लेयर में कारमेल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में के. जी.- प्रथम की छात्रा अक्षिता (पाखी) को यह पुरस्कार कला और ब्लागिंग के क्षेत्र में उसकी विलक्षण उपलब्धि के लिए दिया गया है. इस अवसर पर जारी बुक आफ रिकार्ड्स के अनुसार- ''25 मार्च, 2007 को जन्मी अक्षिता में रचनात्मकता कूट-कूट कर भरी हुई है। ड्राइंग, संगीत, यात्रा इत्यादि से सम्बंधित उनकी गतिविधियाँ उनके ब्लाॅग ’पाखी की दुनिया (http://pakhi-akshita.blogspot.com/) पर उपलब्ध हैं, जो 24 जून, 2009 को आरंभ हुआ था। इस पर उन्हें अकल्पनीय प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। 175 से अधिक ब्लाॅगर इससे जुडे़ हैं। इनके ब्लाॅग 70 देशों के 27000 से अधिक लोगों द्वारा देखे गए हैं। अक्षिता ने नई दिल्ली में अप्रैल, 2011 में हुए अंतर्राष्ट्रीय ब्लाॅगर सम्मेलन में 2010 का ’हिंदी साहित्य निकेतन परिकल्पना का सर्वोत्कृष्ट पुरस्कार’ भी जीता है।इतनी कम उम्र में अक्षिता के एक कलाकार एवं एक ब्लाॅगर के रूप में असाधारण प्रदर्शन ने उन्हें उत्कृष्ट उपलब्धि हेतु 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार, 2011' दिलाया।''इसके तहत अक्षिता को भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ द्वारा 10,000 रूपये नकद राशि, एक मेडल और प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया.

यही नहीं यह प्रथम अवसर था, जब किसी प्रतिभा को सरकारी स्तर पर हिंदी ब्लागिंग के लिए पुरस्कृत-सम्मानित किया गया. अक्षिता का ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' (www.pakhi-akshita.blogspot.com/) हिंदी के चर्चित ब्लॉग में से है और इस ब्लॉग का सञ्चालन उनके माता-पिता द्वारा किया जाता है, पर इस पर जिस रूप में अक्षिता द्वारा बनाये चित्र, पेंटिंग्स, फोटोग्राफ और अक्षिता की बातों को प्रस्तुत किया जाता है, वह इस ब्लॉग को रोचक बनता है.

नन्हीं बिटिया अक्षिता (पाखी) को इस गौरवमयी उपलब्धि पर ढेरों प्यार और शुभाशीष व बधाइयाँ !!
********************************************

मंत्री जी भी अक्षिता (पाखी) के प्रति अपना प्यार और स्नेह न छुपा सकीं, कुछ चित्रमय झलकियाँ....
















Wednesday 9 November 2011

'बाल-दिवस' पर नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार


प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती. तभी तो पाँच वर्षीया नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) को वर्ष 2011 हेतु राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (National Child Award) के लिए चयनित किया गया है. सम्प्रति अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भारतीय डाक सेवा के निदेशक और चर्चित लेखक, साहित्यकार, व ब्लागर कृष्ण कुमार यादव एवं लेखिका व ब्लागर आकांक्षा यादव की सुपुत्री अक्षिता को यह पुरस्कार 'कला और ब्लागिंग' (Excellence in the Field of Art and Blogging) के क्षेत्र में शानदार उपलब्धि के लिए बाल दिवस, 14 नवम्बर 2011 को विज्ञानं भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीर्थ जी द्वारा प्रदान किया जायेगा. इसके तहत अक्षिता को 10,000 रूपये नकद राशि, एक मेडल और प्रमाण-पत्र दिया जायेगा.

यह प्रथम अवसर होगा, जब किसी प्रतिभा को सरकारी स्तर पर हिंदी ब्लागिंग के लिए पुरस्कृत-सम्मानित किया जायेगा. अक्षिता का ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' (www.pakhi-akshita.blogspot.com/) हिंदी के चर्चित ब्लॉग में से है. फ़िलहाल अक्षिता पोर्टब्लेयर में कारमेल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में के. जी.- प्रथम की छात्रा हैं और उनके इस ब्लॉग का सञ्चालन उनके माता-पिता द्वारा किया जाता है, पर इस पर जिस रूप में अक्षिता द्वारा बनाये चित्र, पेंटिंग्स, फोटोग्राफ और अक्षिता की बातों को प्रस्तुत किया जाता है, वह इस ब्लॉग को रोचक बनता है.

नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) को इस गौरवमयी उपलब्धि पर अनेकोंनेक शुभकामनायें और बधाइयाँ !!

- दुर्ग विजय सिंह 'दीप'
उपनिदेशक-आकाशवाणी (समाचार प्रभाग)
, आल इण्डिया रेडियो, पोर्टब्लेयर
अंडमान-निकोबार द्वीप समूह.

Wednesday 2 November 2011

जय हो वीर जवानों की- डॉ० राष्ट्रबंधु

वीर जवानों की जय हो
भारतमाता की जय हो

जो कि सत्य के लिए अड़े
जो कि न्याय के लिए लड़े
भारत माँ की रक्षा में
प्राणदान के लिए बढ़े।
सत्कर्मों का संचय हो
भारतमाता की जय हो।

सर्दी में जो पड़े रहे
मोर्चे पर जो अड़े रहे
नेफा में कश्मीर में
ले बन्दूकें खड़े रहे
पराधीनता का क्षय हो
भारतमाता की जय हो।

उनसे सबकी आजादी
उनसे सबकी खुशहाली
राणा शिवा सुभाष वे
युग उनसे गौरवशाली
परंपरा यह अक्षय हो
भारतमाता की जय हो।


-डॉ० राष्ट्रबंधु
संपादक-बाल साहित्य समीक्षा
रामकृष्ण नगर, कानपुर (यू. पी.)

Wednesday 26 October 2011

जंगल में दीवाली - कृष्ण कुमार यादव


जंगल में मनी दीवाली
चारों तरफ फैली खुशहाली
शेर ने पटाखे छुड़ाये
लोमड़ी ने दिये जलाये

बन्दर करता खूब धमाल
भालू नाचे अपनी चाल
हाथी सब खा गया मिठाई
गिलहरी ने रोनी सूरत बनाई

शेर गरजे पानी बरसे
होती हाथी की ढुंढ़ाई
तब तक लोमड़ी मिठाई लाई
मिल-बाँट कर सबने खाई।


कृष्ण कुमार यादव

Tuesday 11 October 2011

चिड़िया रानी


ची- ची करती चिड़िया रानी,
बच्चों के संग रहती है,
खेल-कूद कर उनके संग,
दाना चुनकर लाती है,
कित्ती मेहनत करती देखो,
श्रम का पाठ पढ़ाती है,
शाम-सवेरे चिड़िया रानी,
नील गगन पर उड़ती है,
बच्चों, तुम भी ऐसे बन जाओ,
मेहनत करो, सफलता पाओ।।

-वृंदा गांधी

Saturday 8 October 2011

माँ - दीनदयाल शर्मा


माँ तू आंगन मैं किलकारी,
माँ ममता की तुम फुलवारी।
सब पर छिड़के जान,
माँ तू बहुत महान।।

दुनिया का दरसन करवाया,
कैसे बात करें बतलाया।

दिया गुरु का ज्ञान,
माँ तू बहुत महान।।

मैं तेरी काया का टुकड़ा,
मुझको तेरा भाता मुखड़ा।
दिया है जीवनदान,
माँ तू बहुत महान।।

कैसे तेरा कर्ज चुकाऊं,
मैं तो अपना फर्ज निभाऊं।
तुझ पर मैं कुर्बान,
माँ तू बहुत महान।।

-दीनदयाल शर्मा,

10/22 आर.एच.बी. कॉलोनी,
हनुमानगढ़ जंक्शन-335512
राजस्थान, भारत

Thursday 15 September 2011

हिंदी है यह हिंदी है...(कृष्ण कुमार यादव)


हिन्दी है यह हिन्दी है
राष्ट्र-भाल की बिन्दी है
भाषाओं की जान है
भारत का अरमान है।

अमर शहीदों ने अपनाया
अंग्रेजों को मार भगाया
बापू थे इसके पैरोकार
संविधान में मिला स्थान।

हम सबकी है यह अभिलाषा
हिन्दी बने राष्ट्र की भाषा
आओ सब गुणगान करें
सब मिलकर सम्मान करें।




Monday 5 September 2011

शिक्षक दिवस पर हार्दिक बधाइयाँ


आज डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्ण का जन्म-दिवस है. इस तिथि को शिक्षक-दिवस के रूप में मनाया जाता है. शिक्षक दिवस की आप सभी को हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें !!

Monday 22 August 2011

भयो नन्द लाल


माचो गोकुल में है त्यौहार, भयो नन्द लाल
खुशिया छाई है अपरम्पार, भयो नन्द लाल

मात यशोदा का है दुलारा,
सबकी आँखों का है तारा
अपनों गोविन्द मदन गोपाल
......... भयो नन्द लाल

मात यशोदा झूम रही है
कृष्णा को वो चूम रही है
झूले पलना मदन गोपाल
......... भयो नन्द लाल

देख के उसकी भोली सुरतिया
बोल रही है सारी सखिया
कितनो सुंदर है मदन गोपाल
......... भयो नन्द लाल

!! कृष्ण जन्माष्टमी की आप सभी को शुभकामनायें !!

जनोक्ति : निर्भय जैन

Monday 15 August 2011

तिरंगे की शान : कृष्ण कुमार यादव


तीन रंगों का प्यारा झण्डा
राष्ट्रीय ध्वज है कहलाता
केसरिया, सफेद और हरा
आन-बान से यह लहराता

चौबीस तीलियों से बना चक्र
प्रगति की राह है दिखाता
समृद्धि और विकास के सपने
ले ऊँचे नभ में सदा फहराता

अमर शहीदों की वीरता और
बलिदान की याद दिलाता
कैसे स्वयं को किया समर्पित
इसकी झलक दिखलाता

आओ हम यह खायें कसम
शान न होगी इसकी कम
वीरों के बलिदानों को
व्यर्थ न जानें देंगे हम।

कृष्ण कुमार यादव

Saturday 13 August 2011

राखी का त्यौहार : कृष्ण कुमार यादव



राखी का त्यौहार अनोखा
भाई-बहन का प्यार अनोखा

आओ भैया, आओ भैया
जल्दी से तुम हाथ बढ़ाओ

रंग-बिरंगी राखी लायी
अपने हाथों में बंधवाओ

करूँ आरती, तिलक लगाऊँ
और मिठाई तुम्हें खिलाऊँ

जल्दी से दे दो उपहार
बहना का है यह त्यौहार

भैया मेरे भूल न जाना
रक्षा का कर्तव्य निभाना।

Monday 18 July 2011

उल्लू : दीनदयाल शर्मा


उल्लू होता सबसे न्यारा,
दिखे इसे चाहे अँधियारा ।
लक्ष्मी का वाहन कहलाए,
तीन लोक की सैर कराए ।

हलधर का यह साथ निभाता,
चूहों को यह चट कर जाता ।
पुतली को ज्यादा फैलाए,
दूर-दूर इसको दिख जाए ।

पीछे भी यह देखे पूरा,
इसको पकड़ न पाए जमूरा ।
जग में सभी जगह मिल जाता,
गिनती में यह घटता जाता ।

ज्ञानीजन सारे परेशान,
कहाँ गए उल्लू नादान।।

संपर्क: 10/22, आर.एच.बी. कॉलोनी, हनुमानगढ़ जं., पिन कोड- 335512, राजस्थान,

मोबाइल - 09414514666

Friday 24 June 2011

धरती को प्रणाम मेरा : डॉ० राष्ट्रबंधु


कण कण को प्रणाम मेरा
क्षण क्षण को प्रणाम मेरा
प्रतिभा को प्रणाम मेरा
धरती को प्रणाम मेरा।

चित्रकूट, वृन्दावन, केरल
सोमनाथ उज्जयिनी धाम
रोमेश्वर, नवद्वीप, अमृतसर
कपिवस्तु साँची अभिराम।
श्रमण बेल गोला, अजमेरी
आस्था को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

जहाँ गुफाएँ और सुरंगें
कहती हैं श्रम की महिमा
खजुराहो, कोणार्क, अजंता
जड़ को देते हैं गरिमा।
चेतन शिल्पकार अनजाने
प्रतिभा को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

मिट्टी के नीचे चट्टानें
जहाँ संगमरमर शैशव
बंजर धरती में भी धन है,
सतत् साधना से वैभव
प्रासादों में पाषाणों की
शोभा को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

वर्षा सब ऋतुओं में रहती
गढ़ती है मनचाहा रूप
हरियाली का फल फसलें हैं
जिनका रूपक भव्य अनूप।
सृजन प्ररूप पानी पर निर्भर
कृषकों को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

छोटे पर्वत बड़े हो गए
बूढ़े कमर झुकाए हैं
उनके ऊपर पशु चलते हैं
पक्षी पर फैलाए हैं
विंध्याचल सहयाद्रि हिमालय
श्रमिकों को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

नैमिष, उत्पल, दण्डक, सुन्दर
वन अंचल केवल हैं शेष
आग और पानी रखते हैं
खनिज खनन देते अवशेष।
बैलाडीला, झारखण्ड के
श्रमिकों को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

कुरुक्षेत्र, हल्दीघाटी के,
कण कण में इतिहास सना
मैदानी भागों में जन जन
के कारण विस्तार बना।
कच्छ, पोखरन हरिकोटा
वैज्ञानिक को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

-डॉ० राष्ट्रबंधु-

Monday 6 June 2011

तालमेल : डॉ० राष्ट्रबंधु


एक फूल पाँखुरी
फूल छोड़कर बढ़ी
वायु के बहाव में
पंक में गिरी झड़ी
हो गई विवश विलाप कर रही
रूप रंग गंध लिए मर रही।

एक बूँद नीर की
साथ छोड़कर बढ़ी
ताप में जली भुनी
भाप की बढ़ी चढ़ी
सूखने लगी अलग थलग हुई
बन गई प्रवाह में छुई मुई।

एकता के योग से
एक तारिका गिरी
अपशकुन हुआ कहीं
व्योम में लगी झिरी
तालमेल टूटना प्रलाप है
तालमेल बैठना प्रताप है।

-डॉ० राष्ट्रबंधु-

Tuesday 31 May 2011

अकड़ : दीनदयाल शर्मा


अकड़-अकड़ कर
क्यों चलते हो
चूहे चिंटूराम,
ग़र बिल्ली ने
देख लिया तो
करेगी काम तमाम,

चूहा मुक्का तान कर बोला
नहीं डरूंगा दादी
मेरी भी अब हो गई है
इक बिल्ली से शादी।

-दीनदयाल शर्मा

Wednesday 18 May 2011

बाल श्रम : डाo एo कीर्तिवर्धन


मैं खुद प्यासा रहता हूँ पर
जन-जन कि प्यास बुझाता हूँ
बालश्रम का मतलब क्या है
समझ नहीं मैं पाता हूँ

भूखी अम्मा, भूखी दादी
भूखा मैं भी रहता हूँ
पानी बेचूं,प्यास बुझाऊं
शाम को रोटी खाता हूँ

उनसे तो मैं ही अच्छा हूँ
जो भिक्षा माँगा करते हैं
नहीं गया विद्यालय तो क्या
मेहनत कि रोटी खाता हूँ

पढ़ लिख कर बन जाऊं नेता
झूठे वादे दे लूँ धोखा
अच्छा इससे अनपढ़ रहना
मानव बनना होगा चोखा

मानवता कि राह चलूँगा
खुशियों के दीप जलाऊंगा
प्यासा खुद रह जाऊँगा,पर
जन जन कि प्यास बुझाऊंगा

--
डाo एo कीर्तिवर्धन
09911323732
http://kirtivardhan.blogspot.com/

Sunday 8 May 2011

माँ के रूप : डा0 मीना अग्रवाल

आज मातृ दिवस है। माँ पर जितना लिखा जाए, कम ही है. माँ वो शब्द है जिसमें सारी कायनात छुपी हुई है. इस सृष्टि का आधार है माँ. नारी का व्यक्तित्व भी ममता के बिना अधूरा है. माँ के भी कई रूप हैं. डॉ. मीना अग्रवाल जी की इस कविता पर गौर कीजिये-



माँ तो है संगीत रूप


माँ गीत रूप, माँ नृत्य रूप


माँ भक्ति रूप, माँ शक्ति रूप


माँ की वाणी है मधु स्वरूप


गति है माँ की ताल रूप


सब कर्म बने थिरकन स्वरूप


व्यक्तित्व बना माँ का अनूप


श्रद्धा की है वह प्रतिरूप


माँ के हैं अनगिनत रूप !!

Monday 25 April 2011

प्यार से समझाएं बच्चों को..

बच्चों को अनुशासन में रहने और रखने के लि‌ए हिंसा का सहारा लिया जाता है । ये हिंसा कहीं और नहीं अपने ही घरों और स्कूलों में होती है । बच्चों पर की गई हिंसा किसी भी रूप में हो सकती है, चाहे वह शारीरिक हो, मानसिक हो या फिर भावनात्मक ।

यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में कहा गया हैं, कि दो से 14 साल की आयु के बच्चों को अनुशासन में रखने के लि‌ए तीन चौथा‌ई बच्चों के साथ हिंसा का सहारा लिया जाता है । इसमें आधे बच्चों को शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है । जेनेवा में आयोजित यू‌एन की मानवाधिकार समिति के बैठक में यूनिसेफ ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत किया । यह रिपोर्ट दुनिया के ३३ निचले और मध्यम आय वाले देशों के 1-14 आयुवर्ग के बच्चों पर आधारित थी, जिसमें बच्चों के अभिभावक भी शामिल थे । बैठक में यू‌एन विशेषज्ञों ने तय किया कि बच्चों के प्रति हिंसात्मक रवैया न अपनाने के लि‌ए जागरूकता फैला‌ई जाये। इसको रोकने लि‌ए दुनियाभर की सरकारें कानूनी कदम उठायें ।

रिपोर्ट में कहा गया है, कि बच्चों को अनुशासन में रखने के लि‌ए घरों में आठ तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है । इसमें कुछ शारीरिक हैं, तो कुछ मानसिक । शारीरिक हिंसा में बच्चों को पीटना या जोर से झकझोरना आदि है, जबकि मानसिक हिंसा में बच्चों पर चीखना या नाम लेकर डांटना आदि है ।

थोड़े देर के लि‌ए यह बात ठीक भी है, लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है जो काफी खतरनाक है । बचपन में बोया गया हिंसा का ये बीज युवा होते-होते विषधर वटवृक्ष का रूप ले लेता है, जो किसी भी रूप में अच्छा नहीं है । यह सच है कि शिक्षा और शिष्टाचार सिखाने के लि‌ए अनुशासन जरूरी है । हो सकता है, अनुशासन के लि‌ए दंड भी आवश्यक हो, लेकिन दंड इतना कभी नहीं होना चाहि‌ए कि बच्चों के कोमल मन और उसके स्वाभिमान पर चोट करे, उसकी कोमल भावना‌एं आहत हो ।

बच्चों पर किये या हु‌ए हिंसक और हृदय विदारक अत्याचार न केवल उनके बाल सुलभ मन को कुंठित करते हैं, बल्कि उनके मन में एक बात घर कर जाती है, कि बड़ों (सबलों) को छोटों (निर्बल) पर हिंसा करने का अधिकार है । बाल सुलभ मन पर घर कर जाने वाली यही बात, कुंठा आगे चलकर निजी जिंदगी और सामाजिक जीवन में विषवेल के रूप में दिखा‌ई देता है । गलती करना इंसान कि फितरत है, और गलती को सुधार लेना इंसान कि बुद्धिमता का परिचायक । गलती को‌ई भी करे, एहसास होने पर उसे भी दुख होता है । गलती पर दंड देने या प्रताड़ित करने से हो चुकी गलती को सुधारा नहीं जा सकता है । प्रताड़ित करने और मन को आहत करने के बजाये उसे बताया जाना चाहि‌ए कि गलती हु‌ई तो क्यों और कैसे हुई? उसके नुकसान का आंकलन बच्चों से ही करा‌एँ।

गलती का एहसास कराने के लि‌ए हिंसक होने की जरूरत नहीं है, प्यार से बता‌एं । प्यार हर काम को आसन करता है । यह मुश्किल तो है, लेकिन दुश्कर नहीं और परिणाम सौ प्रतिशत ।

साभार : समय दर्पण

Friday 1 April 2011

अप्रैल फूल दिवस कहाँ से आया...


अप्रैल फूल दिवस पश्चिमी देशों में हर साल पहली अप्रैल को मनाया जाता है. विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार कभी-कभी ऑल फूल्स डे के रूप में जाना जाने वाला यह दिन, 1 अप्रैल एक आधिकारिक छुट्टी का दिन नहीं है लेकिन इसे व्यापक रूप से एक ऐसे दिन के रूप में जाना और मनाया जाता है जब एक दूसरे के साथ व्यावाहारिक मजाक और सामान्य तौर पर मूर्खतापूर्ण हरकतें की जाती हैं. इस दिन दोस्तों, परिजनों, शिक्षकों, पड़ोसियों, सहकर्मियों आदि के साथ अनेक प्रकार की शरारतपूर्ण हरकतें और अन्य व्यावहारिक मजाक किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य होता है बेवकूफ और अनाड़ी लोगों को शर्मिंदा करना.

पारंपरिक तौर पर कुछ देशों जैसे न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में इस तरह के मजाक केवल दोपहर तक ही किये जाते हैं, और अगर कोई दोपहर के बाद किसी तरह की कोशिश करता है तो उसे "अप्रैल फूल" कहा जाता है. ऐसा इसीलिये किया जाता है क्योंकि ब्रिटेन के अखबार जो अप्रैल फूल पर मुख्य पृष्ठ निकालते हैं वे ऐसा सिर्फ पहले (सुबह के) एडिशन के लिए ही करते हैं. इसके अलावा फ्रांस, आयरलैंड, इटली, दक्षिण कोरिया, जापान रूस, नीदरलैंड, जर्मनी, ब्राजील, कनाडा और अमेरिका में जोक्स का सिलसिला दिन भर चलता रहता है. 1 अप्रैल और मूर्खता के बीच सबसे पहला दर्ज किया गया संबंध चॉसर के कैंटरबरी टेल्स (1392) में पाया जाता है.

रोम, मध्य यूरोप और हिंदू समुदाय में 20 मार्च से लेकर 5 अप्रैल तक नया साल मनाया जाता है। इस दौरान बसंत ऋतु होती है। जूनियल कैलेंडर ने एक अप्रैल से नया साल माना जोकि सन् 1582 तक मनाया गया। इसके बाद पोप ग्रेगी 13वें ने ग्रेगियन कैलेंडर बनाया। इसके अनुसार एक जनवरी को नया साल घोषित किया गया। कई देशों ने सन 1660 में ग्रेगीयन कैलेंडर स्वीकार कर लिया।

जर्मनी, दनिश और नार्वे में सन् 1700 और इंग्लैंड में 1759 में एक जनवरी को नए साल के रूप में स्वीकार किया गया। फ्रांस के लोगों को लगा की साल का पहला दिन बदलकर उन्हें मूर्ख बनाया गया है और पुराने कैलेंडर के नववर्ष को उन्होंने मूर्ख दिवस घोषित कर दिया।

अप्रैल फूल दिवस की एक बानगी देखें कि जीमेल (gmail) के 1 अप्रैल को लांच होने को एक मज़ाक समझा गया था, क्योंकि गूगल पारंपरिक तौर पर हर 1 अप्रैल को अप्रैल फूल्स डे के होक्स जारी करती है, और घोषित किया गया 1 जीबी का ऑनलाइन स्टोरेज उस समय मौजूदा ऑनलाइन ईमेल सेवा के लिए बहुत ही ज्यादा था .

अब तो पूरी दुनिया में ही अप्रैल-फूल का प्रचलन बढ़ चला है, सो भारत भी अछूता नहीं. हर कोई एक दिन पहले से ही तैयारी करने लगता है कि किसे-किसे मूर्ख बनाना है, और कैसे बनाना है.

फ़िलहाल अप्रैल फूल दिवस का लुत्फ़ उठायें, पर किसी कि भावनाएं आहत करने से बचें. बकौल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेन्द्र यादव इस दिन हार्ट पेशेंट का खास ख्याल रखें। उन्होंने कहा कि कई बार गंभीर मजाक से भावनाओं के उतार-चढ़ाव के कारण कोरोनरी में अवरोध पैदा होता है। यदि कोरोनरी धमनियों में पहले से ही समस्या हो तो समस्या गंभीर हो जाती है। इस स्थिति में धमनियों के अंदर की चिकनी सतह खुरदरी हो जाती है। इससे वहां पर कोलेस्ट्रॉल सरीखा तत्व जमा होने लगता है। खून जमना शुरू हो जाता है। यह हृदय के लिए बहुत घातक साबित हो सकता है।किसी का मजाक उड़ाने की बजाय मजाक-मजाक में नई सीख सिखाएं तो इस दिन का भरपूर आनंद लिया जा सकता है.

Friday 25 March 2011

सब हैप्पी बर्थ-डे गाओ...


जन्मदिन है पाखी का
खूब करो धमाल
जमके आज खाओ सब
हो जाओ लाल-लाल।

सब हैप्पी बर्थ-डे गाओ
मस्ती करो, मौज मनाओ
पाखी, तन्वी, कुहू, ख़ुशी
सब मिलकर बैलून फुलाओ।

आईसक्रीम और केक खाओ
कोई भी न मुँह फुलाओ
कितना प्यारा बर्थ-डे केक
सब हैप्पी बर्थ-डे गाओ।


Wednesday 16 March 2011

कहाँ से आई पंचतंत्र की कहानियाँ : आकांक्षा यादव

पंचतंत्र की कहानियाँ तो सभी ने सुनी और पढ़ी होंगी। इससे जुड़ी तमाम कहानियाँ पशु, पक्षी, पेड़, प्रकृति तथा राजा-रानी को आधार बना कर रची गयी हैं। यह जानने की जिज्ञासा हर किसी के मन में अवश्य होगी कि आखिर इन पंचतंत्र की कहानियों की रचना कब, किसने और क्यों की? अब से लगभग 1800 वर्ष पूर्व हमारे देश में अमर शक्ति नामक यशस्वी राजा हुआ। इस राजा बहुशक्ति, उग्रशक्ति एवं मंदशक्ति नामक तीन पुत्र थे। तीनों बात-बात पर झगड़ते रहते थे। उनकी बुद्धिहीनता के कारण राजा बहुत ही चिन्तित रहता था। एक दिन उसने अपनी यह चिन्ता अपने दरबार में मौजूद सभासदों के समक्ष रखी और समस्या के निदान के लिए सभासदों से सुझाव मांगा। उसी दरबार में विष्णु दत्त शर्मा भी सभासद के रूप में मौजूद थे। उन्होंने राजा अमर शक्ति से निवेदन किया कि यदि उन्हें समय दिया जाए तो वे राजकाज की चिन्ता दूर करने के लिए अपनी कुशाग्र बुद्धि एवं कौशल से राजा के तीनों पुत्रों में सुधार ला सकते हे। इसके लिए वे तीनों राजकुमारों को अपने सानिध्य में रखकर उनमें समझदारी विकसित करेंगे एवं उन्हें खुले वातावरण में रख कर छोटी-बड़ी अच्छाई-बुराई, नफा-नुकसान से उन्हें अवगत करा कर उनमें बुद्धि का विकास कर एक कुशाग्र एवं प्रबुद्ध राजकुमारों के गुण विकसित करने का पूरा प्रयत्न करेंगे।

राजा अमर शक्ति को विष्णुदत्त शर्मा का सुझाव बेहद पसंद आया। उन्होंने अपने तीनों पुत्रों को विष्णुदत्त शर्मा के सानिध्य में भेज दिया। विष्णु दत्त ने छोटी-छोटी किन्तु प्रभावकारी कथाएं बना-बना कर राजा के तीनों पुत्रों को सुनाना प्रारम्भ किया। उनकी प्रेरणादायक कहानियों का राजकुमारों पर ऐसा प्रभाव हुआ कि छह महीने के अंतराल में ही उनकी बुद्धिहीनता उड़न छू हो गयी और वे समझदार राजकुमारों की तरह परस्पर बर्ताव व व्यवहार करने लग गये। विष्णुदत्त शर्मा द्वारा राजकुमारों को सुधारने के लिए बना-बनाकर जो कहानियां सुनायी गयी थीं, वही पंचतंत्र की कहानियों के रूप में आगे चल कर प्रसिद्ध र्हुइं। आज भी ये कहानियाँ भारतीय समाज में बड़े चाव से सुनी और बुनी जाती हैं।

आकांक्षा यादव

Tuesday 8 March 2011

101 साल का हो गया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस


अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरूआत 1900 के आरंभ में हुई थी। वर्ष 1908 में न्यूयार्क की एक कपड़ा मिल में काम करने वाली करीब 15 हजार महिलाओं ने काम के घंटे कम करने, बेहतर तनख्वाह और वोट का अधिकार देने के लिए प्रदर्शन किया था। इसी क्रम में 1909 में अमेरिका की ही सोशलिस्ट पार्टी ने पहली बार ''नेशनल वुमन-डे'' मनाया था। वर्ष 1910 में डेनमार्क के कोपेनहेगन में कामकाजी महिलाओं की अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस हुई जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिला दिवस मनाने का फैसला किया गया और 1911 में पहली बार 19 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। इसे सशक्तिकरण का रूप देने हेतु ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में लाखों महिलाओं ने रैलियों में हिस्सा लिया. बाद में वर्ष 1913 में महिला दिवस की तारीख 8 मार्च कर दी गई। तब से हर 8 मार्च को विश्व भर में महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है.इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के 101 साल पूरे हो गए. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आप सभी को शुभकामनायें !!

Tuesday 1 March 2011

गुलाब की प्यारी खुशबू : कृष्ण कुमार यादव


गुलाब की प्यारी खुशबू
ने ऐसा रंग जमाया
फूलों में बन सर्वोत्तम
फूलों का राजा कहलाया।

सफेद,गुलाबी,पीले,लाल
हर रंग में ये आए
एक बार जो देखे इनको
मन ही मन हर्षाये।

कांटों में गुलाब पलता है
कष्टों में गुलाब चलता है
बच्चों अपनाओं इस गुण को
जीवन इसी तरह चलता है।

Wednesday 16 February 2011

झूठी हुई कहावत : घमंडी लाल अग्रवाल


यदि तुम खेलोगे-कूदोगे
तो ख़राब बन जाओगे,
झूठी हुई कहावत यह तो,
सबको ही बतलाओगे।

पढ़ने-लिखने वाले ही क्या
बस नवाब बन पाते हैं?
खेलकूद में रहते अव्वल
वे भी नाम कमाते हैं,
नई धरा है, नया गगन है
नये लक्ष्य तुम पाओगे।

देखो चाहे तेंदुलकर को
या सुनील गावस्कर को,
अथवा पी. टी. ऊषा हो फिर
खेल प्रिय नारी-नर को,
खेलों से ही नाम कमाया,
कैसे उन्हें भुलाओगे?

कितने पुरस्कार खेलों में,
देतीं अपनी सरकारें,
नौकरियों में मिले वरीयता
खुशियाँ हैं झाला मारें,
बढ़ें अगर खेलों में आगे
जीत वलर्ड कप लाओगे।

स्वास्थ्य बने खेलों से उत्तम,
मान और सम्मान मिले,
खेल बढ़ाते भाईचारा,
पंथ बहुत आसान मिले,
खेलो, सुस्ती दूर धकेलो
पूरे जग में छाओगे।

घमंडी लाल अग्रवाल, 785/8 अशोक विहार, गुडगाँव-122001

Tuesday 8 February 2011

वीणावादिनी सरस्वती की पूजा का भी दिन है वसंत पंचमी


वसंत पंचमी एक ओर जहां ऋतुराज के आगमन का दिन है, वहीं यह विद्या की देवी और वीणावादिनी सरस्वती की पूजा का भी दिन है। इस ऋतु में मन में उल्लास और मस्ती छा जाती है और उमंग भर देने वाले कई तरह के परिवर्तन देखने को मिलते हैं। वसंत पंचमी के दिन कोई भी नया काम प्रारम्भ करना शुभ माना जाता है। इसी कारण ऋषियों ने वसन्त पंचमी के दिन सरस्वती पूजा की प्रथा चली आ रही है। किसी भी कला और संगीत कि शिक्षा प्रारम्भ करने से पूर्व माता सरस्वती का पूजन करना शुभ होता है।

जो छात्र मेहनत के साथ माता सरस्वती की आराधना करते है। उन्हें ज्ञान के साथ साथ सम्मान की प्राप्ति भी होती है। वसंत पंचमी के दिन सबसे पहले श्री गणेश का पूजन किया जाता है। श्री गणेश के बाद मां सरस्वती का पूजन किया जाता है। शिक्षा, चतुरता के ऊपर विवेक का अंकुश लगाती है।वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती के भोग में विशेष रूप से चावल का भोग लगाया जाता है। इसका कारण यह है कि मां सरस्वती को श्वेत रंग बहुत प्रिय है साथ ही चावल को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि चावल का भोग लगाने से घर के सभी सदस्यों को मां सरस्वती के आर्शीवाद के साथ सकारात्मक बुद्धि की भी प्राप्ति होती है।

इससे शरद ऋतु की विदाई के साथ ही पेड़-पौधों और प्राणियों में नवजीवन का संचार होता है। प्रकृति नख से शिख तक सजी नजर आती है और तितलियां तथा भंवरे फूलों पर मंडराकर मस्ती का गुंजन गान करते दिखाई देते हैं। इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनने का चलन है, क्योंकि वसंत में सरसों पर आने वाले पीले फूलों से समूची धरती पीली नजर आती है।

वसंत पंचमी की आप सभी को बधाइयाँ !!




Wednesday 26 January 2011

तिरंगे की शान : कृष्ण कुमार यादव


तीन रंगों का प्यारा झण्डा
राष्ट्रीय ध्वज है कहलाता
केसरिया, सफेद और हरा
आन-बान से यह लहराता

चौबीस तीलियों से बना चक्र
प्रगति की राह है दिखाता
समृद्धि और विकास के सपने
ले ऊँचे नभ में सदा फहराता

अमर शहीदों की वीरता और
बलिदान की याद दिलाता
कैसे स्वयं को किया समर्पित
इसकी झलक दिखलाता

आओ हम यह खायें कसम
शान न होगी इसकी कम
वीरों के बलिदानों को
व्यर्थ न जानें देंगे हम।

कृष्ण कुमार यादव

Thursday 20 January 2011

देश की शान बने ये वीर बच्चे...

हर साल की तरह इस साल भी गणतंत्र दिवस के मौके पर 23 बच्चों को उनकी वीरता और अदभूत साहस के लिए बहादुरी पुरस्कार से नवाजा जाएगा। इन बच्चों ने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाई है। गणतंत्र दिवस पर हर साल दिए जाने वाले राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार की घोषणा 17 जनवरी को को भारतीय बाल कल्याण परिषद में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिषद की अध्यक्ष गीता सिद्धार्थ ने की. इनमें से दो को यह पुरस्कार मरणोपरांत मिलेगा। पुरस्कार पाने वाले बच्चों में नौ लड़कियां व 14 लड़के हैं।

प्रतिष्ठित गीता चोपड़ा पुरस्कार केरल की 13 वर्षीय जिस्मी पीएम को पानी में डूबते दो बच्चों को बचाने के लिए मिलेगा। इसी तरह तेंदुए से अपनी बहन को बचाने के लिए उत्तराखंड के 11 वर्षीय प्रियांशु जोशी को संजय चोपड़ा पुरस्कार से नवाजा जाएगा।

राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार पाने वाले अन्य बच्चों में मेघालय के फ्रीडी नांगसिएज, छत्तीसगढ़ के राहुल र्कुे, महाराष्ट्र के रोहित मारुति मुलीक, राजस्थान के श्रवण कुमार, केरल के अनूप एम, मिजोरम की लालमोईजुआली, उत्तरप्रदेश के उत्तम कुमार, मणिपुर के नुरूल हुड्डा, असम की रेखामनी सोनोवल व कल्पना सोनोवाल, पंजाब के गुरजीवन सिंह, सिक्किम के विवेक शर्मा, केरल के राज नारायणन, मेघालय के लवलीस्टार के सोहफोह, छत्तीसगढ़ की पार्वती अमलेश व पश्चिम बंगाल की सुनीता मुरमु शामिल हैं। केरल के बापू गैधानी पुरस्कार अरुणाचल प्रदेश की इपी बसर (16 साल), केरल के विष्णु प्रसाद (16 साल) और मध्यप्रदेश के मुनीस खान (15 साल) को दिया जाएगा। इपी ने दो लोगों को आग से बचाया तो विष्णुदास ने दो बच्चों को डूबने से बचाया जबकि मुनीस खान ने एक वृद्ध व्यक्ति को रेल से कटने से बचाया। जिन दो बच्चों को मरणोपरांत यह पुरस्कार दिया जाएगा, वे हैं राजस्थान की चंपा कंवर और उत्तराखंड की श्रुति लोधी।

हर साल गणतंत्र दिवस से पहले एक विशेष समारोह में प्रधानमंत्री बच्चों को वीरता पुरस्कार प्रदान करते हैं और इस साल भी मनमोहन सिंह जी इसे प्रदान करेंगें. पुरस्कार पाने वाले सभी बच्चे गणतंत्र दिवस की परेड में हिस्सा लेंगे। पुरस्कार के तौर पर सभी बच्चों को पदक, प्रमाणपत्र व नकद राशि मिलेगी।

इन सभी बहादुर बच्चों को बधाई और शुभकामनायें कि वे जीवन में इसी तरह लोगों के प्रेरणा स्रोत बनें और देश का नाम रोशन करें !!

Wednesday 12 January 2011

हम बच्चे प्यारे हैं - डा0 राष्ट्रबंधु

आकाश हमारा है, हमसे उजियारे हैं
तारों जैसे चमचम, आँखों के तारे हैं
हम बच्चे प्यारे हैं।

सौतेले रिस्तों को ध्रुव ने जितना जाना
प्रहलाद पिता पीड़ित ने भोगा जुरमाना
हम वंचित सारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

लवकुश सीता माँ के, गायक बंजारे हैं
तुलसी के चौरे के, हम दीपक न्यारे हैं
हम भाग्य तुम्हारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

दुनिया छोटी लगती, दुनियादारी ठगती
एकलव्य हमारा है, संतोष सहारा है
कर्तव्य हमारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

अधिकार तुम्हारे हैं, तानों के मारे हैं
बरगद की छाया में, अपनों से हारे हैं
हम स्वयं सहारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

हम अपना श्रम देकर, सभ्यता सँवारे हैं

सबकी नजरों से हम गए उतारे हैं
मुस्कान सँवारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

हम वोट नहीं देते, हम नोट नहीं लेते
बटते कब पक्षों में, यक्षों या कक्षा में
आवरण उघारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

बनकर जुलूस लम्बा, छोटापन धारे हैं
जो जीत चुनाव गए, हम उनके मारे हैं
कब लगे किनारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

-डा० राष्ट्रबंधु

Friday 7 January 2011

और किसी दिन आओ - डा. नागेश पांडेय 'संजय'


ट्रिन ट्रिन घंटी सुनकर चूहा ,

दरवाजे पर आया .

बोला -" जी , क्या काम , कहो क्यों ,

याद हमें फ़रमाया ? "

" बिल वाला हूँ , बिल लाया हूँ ;

बिल के पैसे लाओ.

बिल में घुसकर चूहा बोला -

" और किसी दिन आओ । "

Monday 3 January 2011

एक नन्हा संपादक जो अखबार का हॉकर भी है

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद का एक 12 साल का एक किशोर एक ऐसा अखबार निकाल रहा है, जिसके संपादक से लेकर संवाददाता, प्रकाशक और हॉकर का काम भी वही कर रहा है। इलाहाबाद के चांदपुर सलोरी इलाके की काटजू कालोनी में रहने वाला उत्कर्ष त्रिपाठी पिछले एक साल से हाथ से लिखकर 'जागृति' नामक चार पृष्ठों का एक सप्ताहिक अखबार प्रकाशत कर रहा है। उत्कर्ष ब्रज बिहारी इंटर कालेज में आठवीं कक्षा का छात्र है।

उत्कर्ष को अपने इस सप्ताहिक अखबार के लिए एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ता। उत्कर्ष सबसे पहले हाथ से पाठ्य सामग्री को लिखकर अखबार के चार पन्ने तैयार करता है और बाद में उसकी फोटो कापी करवाकर उसकी प्रतियाँ अपने पाठकों तक पहुँचा देता है। वर्तमान समय में जागृति के विभिन्न आयु वर्ग के करीब 150 पाठक हैं।

उत्कर्ष ने बताया कि जागृति के पाठकों में मेरे स्कूल से सहपाठी, वरिष्ठ छात्र, शक्षिक और पड़ोसी शामिल हैं। उत्कर्ष ने अपने अखबार का नाम 'जागृति' इसलिए रखा, क्योंकि उसका मिशन लोगों को उनके हितों के प्रति जागरूक करना है, जो उन्हें प्रभावित करते हैं।

वह अखबार के संपादकीय पन्ने पर भ्रूणहत्या, पर्यावरण जैसे सामाजिक मुद्दों को नियमित उठाने का प्रयास करता है। इसके अलावा अखबार में जनकल्याणकारी योजनाओं एवं बच्चों के कल्याण के लिए सरकारी नीतियों के बारे में जानकारी दी जाती है। इसमें प्रेरणात्मक लेख होने के साथ प्रसिद्ध वैज्ञानिकों, कलाकारों, राजनेताओं की सफलता की कहानियाँ भी होती हैं।

उत्कर्ष के मुताबिक वह हर रोज एक घंटा अखबार के लिए समय निकालता है, जिसमें मुद्दों को ढूंढ़ना और तय करना, दैनिक अखबारों, सप्ताहिक पत्रिकाओं और इंटरनेट से ज्ञानवर्धक सूचनाएं एकत्र करता है। रविवार के दिन उसे अखबार के लिए ज्यादा समय मिल जाता है। उस दिन वह विभिन्न लेखों के लिए तस्वीरें एकत्र करता है।

साभार : हिंदी मीडिया. इन