Sunday 8 May 2011

माँ के रूप : डा0 मीना अग्रवाल

आज मातृ दिवस है। माँ पर जितना लिखा जाए, कम ही है. माँ वो शब्द है जिसमें सारी कायनात छुपी हुई है. इस सृष्टि का आधार है माँ. नारी का व्यक्तित्व भी ममता के बिना अधूरा है. माँ के भी कई रूप हैं. डॉ. मीना अग्रवाल जी की इस कविता पर गौर कीजिये-



माँ तो है संगीत रूप


माँ गीत रूप, माँ नृत्य रूप


माँ भक्ति रूप, माँ शक्ति रूप


माँ की वाणी है मधु स्वरूप


गति है माँ की ताल रूप


सब कर्म बने थिरकन स्वरूप


व्यक्तित्व बना माँ का अनूप


श्रद्धा की है वह प्रतिरूप


माँ के हैं अनगिनत रूप !!
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