Friday 22 October 2010

मिलकर रहते कितने सारे - संजय भास्कर


देखो एक गगन पर तारे,

मिलकर रहते कितने सारे

नन्हें-मुन्ने प्यारे बच्चों,

इनसे मिल कर रहना सीखो

अपना लो तारों की आदत,

लगने लगोगे सबको प्यारे


या फिर शिक्षा फलों से लो,

एक बाग़ में खिलते सारे

कभी न आपस में लड़ते वो,

एक को एक भी न मारे


अगर न तुमको हो कुछ आता,

तो ले लो औरों से शिक्षा

मिलकर रहना हमें सिखाते,

कुदरत के लाखों नज़ारे


संजय भास्कर
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