Wednesday, 13 October, 2010

नन्हे-मुन्नों की पैनी नज़र, भेदती धरती-आकाश की खबर

प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती. यदि उचित परिवेश मिले तो बच्चे भी बड़ों जैसा कार्य कर सकते हैं. झारखण्ड में जमदेशपुर के पास मुसाबनी इलाके के नन्हें पत्रकार आजकल चर्चा में हैं. यूनिसेफ के सहयोग से चल रहे कार्यक्रम में प्रकाशित ये बच्चे किसी से पीछे नहीं हैं. वे रिपोर्टिंग करते हैं, फोटोग्राफी करते हैं और कई बार अपने कार्यों से लोगों को सचेत/सजग भी करते हैं. इनके अख़बार हैं- संथाल दर्पण, टालाडीह खबर, हालधबनी टाइम्स...और भी ढेर सारे. इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट आउटलुक पत्रिका के सितम्बर -2010 अंक में प्रकाशित हुई है. उसे यहाँ साभार स्कैन कर प्रकाशित किया जा रहा है-




(साभार : आउटलुक, सितम्बर 2010)

12 comments:

डॉ. मोनिका शर्मा said...

in bachhon ki mehnat aur pratibha ko salam....

www.dakbabu.blogspot.com said...

गीता श्री की यह रिपोर्ट पढ़ी. वाकई सारगर्भित और बाल-मन के जज्बों को आवाज़ देती.

Akshitaa (Pakhi) said...

हमारी तरह नन्हे-मुन्ने पत्रकारों के बारे में जानकर अच्छा लगा...

प्रवीण पाण्डेय said...

बच्चों का अद्भुत प्रयास।

Shahroz said...

यूनिसेफ के सहयोग से चल रहे कार्यक्रम में प्रकाशित ये बच्चे किसी से पीछे नहीं हैं. वे रिपोर्टिंग करते हैं, फोटोग्राफी करते हैं और कई बार अपने कार्यों से लोगों को सचेत/सजग भी करते हैं..Thats great effort..congts.

Amit Kumar Yadav said...

बच्चों की बात ही निराली है...रोचक पोस्ट..आभार.

Amit Kumar Yadav said...

बच्चों की बात ही निराली है...रोचक पोस्ट..आभार.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

सुन्दर पोस्ट के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ!
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आपकी पोस्ट की चर्चा बाल चर्चा मंच पर भी की गई है!
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/10/23.html

रानीविशाल said...

इनके बारे में जान कर बहुत अच्छा लगा .....आभार
नन्ही ब्लॉगर
अनुष्का

Ram Shiv Murti Yadav said...

Great...!!

Ram Shiv Murti Yadav said...

विजयदशमी की शुभकामनायें.

माधव( Madhav) said...

सारगर्भित