Thursday 9 September 2010

बारिश का मौसम : दीनदयाल शर्मा

बारिश का मौसम है आया।
हम बच्चों के मन को भाया।।
'छु' हो गई गरमी सारी।
मारें हम मिलकर किलकारी।।
कागज की हम नाव चलाएं।
छप-छप नाचें और नचाएं।।
मजा आ गया तगड़ा भारी।
आंखों में आ गई खुमारी।।
गरम पकौड़ी मिलकर खाएं।
चना चबीना खूब चबाएं।।
गरम चाय की चुस्की प्यारी।
मिट गई मन की खुश्की सारी।।
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