Monday 20 September 2010

विलक्षण विशेषताओं को समेटे हुए क्वीन्स बैटन : कृष्ण कुमार यादव

भारत इस वर्ष 3 अक्टूबर से 19 वें राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन कर रहा है। परंपरानुसार इसकी शुरूआत 29 अक्तूबर, 2009 को बकिंघम पैलेस, लंदन में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा भारत की राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल को क्वीन्स बैटन हस्तांतरित करके हुई। इसके बाद ओलम्पिक एयर राइफल चैंपियन, अभिनव बिंद्रा ने क्वीन विक्टोरिया माॅन्युमेंट के चारों ओर रिले करते हुए क्वीन्स बैटन की यात्रा शुरू की। क्वीन्स बैटन सभी 71 राष्ट्रमंडल देशों में घूमने के बाद 25 जून, 2010 को पाकिस्तान से बाघा बार्डर द्वारा भारत में पहुँच गई और उसे पूरे देश में 100 दिनों तक घुमाया जाएगा। इस बीच यह जिस भी शहर से गुजर रही है, वहाँ इसका रंगारंग कार्यक्रमों द्वारा स्वागत किया जा रहा है। गौरतलब है कि आस्ट्रेलिया के बाद भारत दूसरा देश है, जहाँ इसके सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में बैटन रिले ले जाया जा रहा है.

गौरतलब है कि सन् 1958 से प्रत्येक काॅमनवेल्थ खेलों का अग्रदूत रही क्वीन्स बैटन रिले इन खेलों की सर्वश्रेष्ठ परंपराओं में एक है। वस्तुतः ’रिले’, खेल और संस्कृति के इस चार वर्षीय उत्सव में राष्ट्रमंडल देशों के एकजुट होने का प्रतीक है। विगत वर्षों में, क्वीन्स बैटन रिले राष्ट्रमंडल देशों की एकता एवं अनेकता के सशक्त प्रतीक के रूप में विकसित हुआ है। प्रत्येक खेल के साथ, पैमाने और महत्व की दृष्टि से इस परम्परा का विस्तार हो रहा है एवं इसमें और देश और प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। दिल्ली 2010 बैटन रिले यात्रा को अब तक की सबसे बड़ी रिले यात्रा माना जा रहा है। इस बैटन को माइकल फाॅली ने डिजाइन किया है, जो नेशनल इंस्टिट्यूट आॅफ डिजाइन के स्नातक हैं। यह बैटन तिकोने आकार का अल्युमिनियम से बना हुआ है, जिसे मोड़ कर कुण्डली का आकार दिया गया है। इसे भारत के सभी क्षेत्रों से एकत्र विभिन्न रंगों की मिट्टी के रंगों से रंगा गया है। क्वीन्स बैटन को रूप प्रदान करने में विभिन्न रंगों की मिट्टी का इस्तेमाल पहली बार किया गया है। रत्नजड़ित बक्से में ब्रिटेन के महारानी के संदेश को रखा गया है और इस संदेश को प्राचीन भारतीय पत्रों के प्रतीक 18 कैरट सोने की पŸाी में लेजर से मीनिएचर के रूप में उकेरा गया है ताकि इसे आसानी से प्रयोग किया जा सके। क्वीन्स बैटन की रूपरेखा अत्यंत परिश्रम से तैयार की गई है। इसकी उंचाई 664 मिलीमीटर है, निचले हिस्से में इसकी चैड़ाई 34 मिलीमीटर है और ऊपरी हिस्से में इसकी चैड़ाई 86 मिलीमीटर है। इसका वजन 1,900 ग्राम है।

क्वीन्स बैटन अपने अंदर बहुत सी विलक्ष्ण विशेषताओं को समेटे हुए है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। मसलन, इसमें चित्र खींचने और ध्वनि रिकार्ड करने की क्षमता है तो इसमें ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) टेक्नोलाॅजी भी मौजूद है जिससे बैटन के स्थान की स्थिति हरदम प्राप्त की जा सकती है। यही नहीं इसमें जड़े हुए लाइट एमिटिंग डायोड (एलईडी) द्वारा जिस देश में बैटन ह,ै उस देश के झंडे के रंग में परिवर्तित हो जाता है। इसके अलावा यह टेक्स्ट मैसेजिंग क्षमता से लैस है ताकि लोग बैटन वाहकों को समूचे रिले के दौरान बधाई एवं प्रेरणादायक संदेश भेज सकें। यह अब तक की सबसे लंबी तकनीकी रूप से विकसित बैटन रिले भी है। गौरतलब है कि भारतीय डाक विभाग ने भी काॅमनवेल्थ खेल 2010 के अग्रदूत के रूप में बैटन के भारत में पहुंचने के उपलक्ष्य में इस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में दो स्मारक डाक टिकटों का सेट जारी किया है। एक सेट में बैटन का चित्र है और दूसरे में दिल्ली के इंडिया गेट की पृष्ठभूमि में गौरवान्वित शेरा को बैटन पकड़े हुए चित्रित किया गया है।
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