Friday, 24 June, 2011

धरती को प्रणाम मेरा : डॉ० राष्ट्रबंधु


कण कण को प्रणाम मेरा
क्षण क्षण को प्रणाम मेरा
प्रतिभा को प्रणाम मेरा
धरती को प्रणाम मेरा।

चित्रकूट, वृन्दावन, केरल
सोमनाथ उज्जयिनी धाम
रोमेश्वर, नवद्वीप, अमृतसर
कपिवस्तु साँची अभिराम।
श्रमण बेल गोला, अजमेरी
आस्था को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

जहाँ गुफाएँ और सुरंगें
कहती हैं श्रम की महिमा
खजुराहो, कोणार्क, अजंता
जड़ को देते हैं गरिमा।
चेतन शिल्पकार अनजाने
प्रतिभा को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

मिट्टी के नीचे चट्टानें
जहाँ संगमरमर शैशव
बंजर धरती में भी धन है,
सतत् साधना से वैभव
प्रासादों में पाषाणों की
शोभा को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

वर्षा सब ऋतुओं में रहती
गढ़ती है मनचाहा रूप
हरियाली का फल फसलें हैं
जिनका रूपक भव्य अनूप।
सृजन प्ररूप पानी पर निर्भर
कृषकों को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

छोटे पर्वत बड़े हो गए
बूढ़े कमर झुकाए हैं
उनके ऊपर पशु चलते हैं
पक्षी पर फैलाए हैं
विंध्याचल सहयाद्रि हिमालय
श्रमिकों को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

नैमिष, उत्पल, दण्डक, सुन्दर
वन अंचल केवल हैं शेष
आग और पानी रखते हैं
खनिज खनन देते अवशेष।
बैलाडीला, झारखण्ड के
श्रमिकों को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

कुरुक्षेत्र, हल्दीघाटी के,
कण कण में इतिहास सना
मैदानी भागों में जन जन
के कारण विस्तार बना।
कच्छ, पोखरन हरिकोटा
वैज्ञानिक को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

-डॉ० राष्ट्रबंधु-

11 comments:

KK Yadav said...

चित्रकूट, वृन्दावन, केरल
सोमनाथ उज्जयिनी धाम
रोमेश्वर, नवद्वीप, अमृतसर
कपिवस्तु साँची अभिराम।
श्रमण बेल गोला, अजमेरी
आस्था को प्रणाम मेरा।
..बहुत सुन्दर कविता ...बधाई !!

KK Yadav said...

चित्रकूट, वृन्दावन, केरल
सोमनाथ उज्जयिनी धाम
रोमेश्वर, नवद्वीप, अमृतसर
कपिवस्तु साँची अभिराम।
श्रमण बेल गोला, अजमेरी
आस्था को प्रणाम मेरा।
..बहुत सुन्दर कविता ...बधाई !!

समयचक्र said...

सुन्दर रचना प्रस्तुति...आभार

Ram Shiv Murti Yadav said...

राष्ट्रबंधु जी को पढना सदैव सुखद लगता है. अच्छी रचना..बधाई.

प्रवीण पाण्डेय said...

भारत की विरासत समेटे अनुपम रचना।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर रचना!
--
बाल साहित्य के पुरोधा डॉ. राष्ट्रबन्धु को प्रणाम!

Udan Tashtari said...

सुन्दर कविता पढ़वाने का आभार.

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

सुंदर रचना।

---------
विलुप्‍त हो जाएगा इंसान?
कहाँ ले जाएगी, ये लड़कों की चाहत?

डॉ. नागेश पांडेय संजय said...

बहुत सुन्दर

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आकांक्षा जी बहुत सुन्दर रचना भारत भ्रमण कराया आप ने -सुन्दर -

लेकिन ये रोमेश्वर है या रामेश्वर (शिव धाम )

कपिवस्तु या कपिलवस्तु

जो सही हो कृपया ठीक कर दें
बधाई हो -शुक्ल भ्रमर ५

चित्रकूट, वृन्दावन, केरल
सोमनाथ उज्जयिनी धाम
रोमेश्वर, नवद्वीप, अमृतसर
कपिवस्तु साँची अभिराम।
श्रमण बेल गोला, अजमेरी
आस्था को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

Vandana Ramasingh said...

बाल दुनिया में आना अच्छा लगा