Wednesday 21 July 2010

बच्चों को स्कूल में पीटा तो...

स्कूलों में शिक्षकों द्वारा बच्चों को पीटने की घटना आम है। हालांकि अब इसमें काफी हद तक कमी आई है। बावजूद इसके अब बच्चों को पीटना आसान नहीं होगा, क्योंकि अब एक ऐसा मॉडयूल तैयार किया गया जो बच्चों को शिक्षकों की पिटाई से बचाएगा। एक प्रकार का यह टूल किट शिक्षकों को उनके सवालों के जवाब देते हुए उन्हे स्कूलों में एक सकारात्मक वातावरण तैयार करने में सहायता देगा। प्लॉन इंडिया ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग के सहयोग से एक पॉजिटिव डिसीपलीन मॉडयूल तैयार किया गया है।

मॉड्यूल का फाइनल ड्राफ्ट एनसीईआरटी व यूनिसेफ से प्राप्त हुए फीड बैक के आधार पर तैयार हुआ है। देश भर में वर्ष 2015 तक सात राज्यों के 2000 स्कूलों तक इसे पहुंचाने का लक्ष्य भी तैयार किया गया है। मॉडयूल तैयार करने के पीछे प्रमुख उद्देश्य स्कूलों में हर प्रकार की हिंसा को रोकने के लिए वातावरण तैयार करना है। खासकर यह मॉडयूल कक्षा एक से आठ तक के शिक्षकों व मुख्य अध्यापकों को पढ़ाने की तकनीक सिखाने में सहायक बनेगा।

भारत में यह शैक्षणिक सिस्टम से हिंसा को रोकने में काफी कारगर होगा। स्कूलों में बच्चों के साथ हिंसात्मक कार्रवाई न हो इसके संबंध में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। जागरूकता फैलाने के लिए प्लॉन इंडिया 60 वॉलंटियर तैयार करेगा, जिनकी मदद से अन्य राज्यों में स्कूलों में हिंसात्मक गतिविधियों की रोकथाम की जाएगी। इसके माध्यम से स्कूल में सकारात्मक वातावरण तैयार किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि प्लॉन इंडिया की एक स्टडी के आधार पर मॉडयूल तैयार हुआ है। दरअसल स्टडी में पाया गया है कि स्कूलों में बच्चे 33 विभिन्न प्रकार की सजा की शिकायतें करते है, जिसमें उन्हे पीटना, रस्सी से बांधना, शारीरिक प्रताड़ना जैसी घटनाएं शामिल है। हैरत की बात यह है कि इतने सारे बच्चों को यह नहीं लगा कि पीटा जाना ठीक था।
तो टीचर जी, अब संभल जाएँ...यदि बच्चों को स्कूल में पीटा तो...
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