Tuesday 31 May 2011

अकड़ : दीनदयाल शर्मा


अकड़-अकड़ कर
क्यों चलते हो
चूहे चिंटूराम,
ग़र बिल्ली ने
देख लिया तो
करेगी काम तमाम,

चूहा मुक्का तान कर बोला
नहीं डरूंगा दादी
मेरी भी अब हो गई है
इक बिल्ली से शादी।

-दीनदयाल शर्मा

Wednesday 18 May 2011

बाल श्रम : डाo एo कीर्तिवर्धन


मैं खुद प्यासा रहता हूँ पर
जन-जन कि प्यास बुझाता हूँ
बालश्रम का मतलब क्या है
समझ नहीं मैं पाता हूँ

भूखी अम्मा, भूखी दादी
भूखा मैं भी रहता हूँ
पानी बेचूं,प्यास बुझाऊं
शाम को रोटी खाता हूँ

उनसे तो मैं ही अच्छा हूँ
जो भिक्षा माँगा करते हैं
नहीं गया विद्यालय तो क्या
मेहनत कि रोटी खाता हूँ

पढ़ लिख कर बन जाऊं नेता
झूठे वादे दे लूँ धोखा
अच्छा इससे अनपढ़ रहना
मानव बनना होगा चोखा

मानवता कि राह चलूँगा
खुशियों के दीप जलाऊंगा
प्यासा खुद रह जाऊँगा,पर
जन जन कि प्यास बुझाऊंगा

--
डाo एo कीर्तिवर्धन
09911323732
http://kirtivardhan.blogspot.com/

Sunday 8 May 2011

माँ के रूप : डा0 मीना अग्रवाल

आज मातृ दिवस है। माँ पर जितना लिखा जाए, कम ही है. माँ वो शब्द है जिसमें सारी कायनात छुपी हुई है. इस सृष्टि का आधार है माँ. नारी का व्यक्तित्व भी ममता के बिना अधूरा है. माँ के भी कई रूप हैं. डॉ. मीना अग्रवाल जी की इस कविता पर गौर कीजिये-



माँ तो है संगीत रूप


माँ गीत रूप, माँ नृत्य रूप


माँ भक्ति रूप, माँ शक्ति रूप


माँ की वाणी है मधु स्वरूप


गति है माँ की ताल रूप


सब कर्म बने थिरकन स्वरूप


व्यक्तित्व बना माँ का अनूप


श्रद्धा की है वह प्रतिरूप


माँ के हैं अनगिनत रूप !!