Wednesday 26 January 2011

तिरंगे की शान : कृष्ण कुमार यादव


तीन रंगों का प्यारा झण्डा
राष्ट्रीय ध्वज है कहलाता
केसरिया, सफेद और हरा
आन-बान से यह लहराता

चौबीस तीलियों से बना चक्र
प्रगति की राह है दिखाता
समृद्धि और विकास के सपने
ले ऊँचे नभ में सदा फहराता

अमर शहीदों की वीरता और
बलिदान की याद दिलाता
कैसे स्वयं को किया समर्पित
इसकी झलक दिखलाता

आओ हम यह खायें कसम
शान न होगी इसकी कम
वीरों के बलिदानों को
व्यर्थ न जानें देंगे हम।

कृष्ण कुमार यादव

Thursday 20 January 2011

देश की शान बने ये वीर बच्चे...

हर साल की तरह इस साल भी गणतंत्र दिवस के मौके पर 23 बच्चों को उनकी वीरता और अदभूत साहस के लिए बहादुरी पुरस्कार से नवाजा जाएगा। इन बच्चों ने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाई है। गणतंत्र दिवस पर हर साल दिए जाने वाले राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार की घोषणा 17 जनवरी को को भारतीय बाल कल्याण परिषद में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिषद की अध्यक्ष गीता सिद्धार्थ ने की. इनमें से दो को यह पुरस्कार मरणोपरांत मिलेगा। पुरस्कार पाने वाले बच्चों में नौ लड़कियां व 14 लड़के हैं।

प्रतिष्ठित गीता चोपड़ा पुरस्कार केरल की 13 वर्षीय जिस्मी पीएम को पानी में डूबते दो बच्चों को बचाने के लिए मिलेगा। इसी तरह तेंदुए से अपनी बहन को बचाने के लिए उत्तराखंड के 11 वर्षीय प्रियांशु जोशी को संजय चोपड़ा पुरस्कार से नवाजा जाएगा।

राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार पाने वाले अन्य बच्चों में मेघालय के फ्रीडी नांगसिएज, छत्तीसगढ़ के राहुल र्कुे, महाराष्ट्र के रोहित मारुति मुलीक, राजस्थान के श्रवण कुमार, केरल के अनूप एम, मिजोरम की लालमोईजुआली, उत्तरप्रदेश के उत्तम कुमार, मणिपुर के नुरूल हुड्डा, असम की रेखामनी सोनोवल व कल्पना सोनोवाल, पंजाब के गुरजीवन सिंह, सिक्किम के विवेक शर्मा, केरल के राज नारायणन, मेघालय के लवलीस्टार के सोहफोह, छत्तीसगढ़ की पार्वती अमलेश व पश्चिम बंगाल की सुनीता मुरमु शामिल हैं। केरल के बापू गैधानी पुरस्कार अरुणाचल प्रदेश की इपी बसर (16 साल), केरल के विष्णु प्रसाद (16 साल) और मध्यप्रदेश के मुनीस खान (15 साल) को दिया जाएगा। इपी ने दो लोगों को आग से बचाया तो विष्णुदास ने दो बच्चों को डूबने से बचाया जबकि मुनीस खान ने एक वृद्ध व्यक्ति को रेल से कटने से बचाया। जिन दो बच्चों को मरणोपरांत यह पुरस्कार दिया जाएगा, वे हैं राजस्थान की चंपा कंवर और उत्तराखंड की श्रुति लोधी।

हर साल गणतंत्र दिवस से पहले एक विशेष समारोह में प्रधानमंत्री बच्चों को वीरता पुरस्कार प्रदान करते हैं और इस साल भी मनमोहन सिंह जी इसे प्रदान करेंगें. पुरस्कार पाने वाले सभी बच्चे गणतंत्र दिवस की परेड में हिस्सा लेंगे। पुरस्कार के तौर पर सभी बच्चों को पदक, प्रमाणपत्र व नकद राशि मिलेगी।

इन सभी बहादुर बच्चों को बधाई और शुभकामनायें कि वे जीवन में इसी तरह लोगों के प्रेरणा स्रोत बनें और देश का नाम रोशन करें !!

Wednesday 12 January 2011

हम बच्चे प्यारे हैं - डा0 राष्ट्रबंधु

आकाश हमारा है, हमसे उजियारे हैं
तारों जैसे चमचम, आँखों के तारे हैं
हम बच्चे प्यारे हैं।

सौतेले रिस्तों को ध्रुव ने जितना जाना
प्रहलाद पिता पीड़ित ने भोगा जुरमाना
हम वंचित सारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

लवकुश सीता माँ के, गायक बंजारे हैं
तुलसी के चौरे के, हम दीपक न्यारे हैं
हम भाग्य तुम्हारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

दुनिया छोटी लगती, दुनियादारी ठगती
एकलव्य हमारा है, संतोष सहारा है
कर्तव्य हमारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

अधिकार तुम्हारे हैं, तानों के मारे हैं
बरगद की छाया में, अपनों से हारे हैं
हम स्वयं सहारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

हम अपना श्रम देकर, सभ्यता सँवारे हैं

सबकी नजरों से हम गए उतारे हैं
मुस्कान सँवारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

हम वोट नहीं देते, हम नोट नहीं लेते
बटते कब पक्षों में, यक्षों या कक्षा में
आवरण उघारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

बनकर जुलूस लम्बा, छोटापन धारे हैं
जो जीत चुनाव गए, हम उनके मारे हैं
कब लगे किनारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

-डा० राष्ट्रबंधु

Friday 7 January 2011

और किसी दिन आओ - डा. नागेश पांडेय 'संजय'


ट्रिन ट्रिन घंटी सुनकर चूहा ,

दरवाजे पर आया .

बोला -" जी , क्या काम , कहो क्यों ,

याद हमें फ़रमाया ? "

" बिल वाला हूँ , बिल लाया हूँ ;

बिल के पैसे लाओ.

बिल में घुसकर चूहा बोला -

" और किसी दिन आओ । "

Monday 3 January 2011

एक नन्हा संपादक जो अखबार का हॉकर भी है

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद का एक 12 साल का एक किशोर एक ऐसा अखबार निकाल रहा है, जिसके संपादक से लेकर संवाददाता, प्रकाशक और हॉकर का काम भी वही कर रहा है। इलाहाबाद के चांदपुर सलोरी इलाके की काटजू कालोनी में रहने वाला उत्कर्ष त्रिपाठी पिछले एक साल से हाथ से लिखकर 'जागृति' नामक चार पृष्ठों का एक सप्ताहिक अखबार प्रकाशत कर रहा है। उत्कर्ष ब्रज बिहारी इंटर कालेज में आठवीं कक्षा का छात्र है।

उत्कर्ष को अपने इस सप्ताहिक अखबार के लिए एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ता। उत्कर्ष सबसे पहले हाथ से पाठ्य सामग्री को लिखकर अखबार के चार पन्ने तैयार करता है और बाद में उसकी फोटो कापी करवाकर उसकी प्रतियाँ अपने पाठकों तक पहुँचा देता है। वर्तमान समय में जागृति के विभिन्न आयु वर्ग के करीब 150 पाठक हैं।

उत्कर्ष ने बताया कि जागृति के पाठकों में मेरे स्कूल से सहपाठी, वरिष्ठ छात्र, शक्षिक और पड़ोसी शामिल हैं। उत्कर्ष ने अपने अखबार का नाम 'जागृति' इसलिए रखा, क्योंकि उसका मिशन लोगों को उनके हितों के प्रति जागरूक करना है, जो उन्हें प्रभावित करते हैं।

वह अखबार के संपादकीय पन्ने पर भ्रूणहत्या, पर्यावरण जैसे सामाजिक मुद्दों को नियमित उठाने का प्रयास करता है। इसके अलावा अखबार में जनकल्याणकारी योजनाओं एवं बच्चों के कल्याण के लिए सरकारी नीतियों के बारे में जानकारी दी जाती है। इसमें प्रेरणात्मक लेख होने के साथ प्रसिद्ध वैज्ञानिकों, कलाकारों, राजनेताओं की सफलता की कहानियाँ भी होती हैं।

उत्कर्ष के मुताबिक वह हर रोज एक घंटा अखबार के लिए समय निकालता है, जिसमें मुद्दों को ढूंढ़ना और तय करना, दैनिक अखबारों, सप्ताहिक पत्रिकाओं और इंटरनेट से ज्ञानवर्धक सूचनाएं एकत्र करता है। रविवार के दिन उसे अखबार के लिए ज्यादा समय मिल जाता है। उस दिन वह विभिन्न लेखों के लिए तस्वीरें एकत्र करता है।

साभार : हिंदी मीडिया. इन